Monday, 28 November 2016

आज की ताजा खबर


 सातवें वेतन समिति की रिपोर्ट तैयार, सीएम से मांगा समय रिपोर्ट पर अगले माह लगेगी कैबिनेट की मुहर, नए साल में मिल सकता है बढ़े वेतनमान का तोहफा

लखनऊ : सूबे के 21 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को सातवें वेतन आयोग की सौगात जल्द मिलने की उम्मीद है। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को प्रदेश के विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों पर लागू करने के बारे में विचार
करने के लिए गठित राज्य वेतन समिति ने अपनी पहली रिपोर्ट तैयार कर ली है। समिति के अध्यक्ष जी.पटनायक ने रिपोर्ट सौंपने के लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा है। संभावना है कि समिति की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को इसी महीने सुपुर्द कर दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में विभिन्न वर्गो के कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित सातवें वेतन के ढांचे को केंद्र सरकार के समतुल्य रखा गया है। राज्य वेतन समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस पर अगले माह कैबिनेट की मुहर लगवाएगी। सरकार को यह तय करना होगा कि रिपोर्ट की सिफारिशों को कब से लागू करना है। चुनावी वर्ष होने के कारण माना जा रहा है कि सरकार जल्दी से जल्दी कर्मचारियों को सातवें वेतन की सौगात देना चाहेगी। संभावना जतायी जा रही है कि सरकार नये साल की शुरुआत यानी जनवरी में कर्मचारियों को यह तोहफा दे सकती है। राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में कर्मचारियों को सातवें वेतन के भुगतान के लिए धनराशि की व्यवस्था की है। चूंकि सातवें वेतन की सिफारिशें पहली जनवरी, 2016 से लागू होनी हैं, लिहाजा सरकार को कर्मचारियों को दिये जाने वाले एरियर के भुगतान की प्रक्रिया भी तय करनी होगी। छठवें वेतनमान के समय राज्य सरकार ने कर्मचारियों को एरियर का भुगतान तीन वार्षिक किस्तों में किया था। पहली किस्त में कुल एरियर का 20 प्रतिशत और बाकी दो किस्तों में 40-40 फीसद का भुगतान हुआ था। चूंकि भत्ताें को लेकर केंद्रीय आयोग ने कोई सिफारिश नहीं की है, लिहाजा राज्य वेतन समिति ने भी अपने पहली प्रतिवेदन में इस पर चुप्पी साधी है। वैसे राज्य कर्मचारियों को महंगाई भत्ता भी केंद्रीय कार्मिकों के समतुल्य मिलता है।


इलाहाबाद के बेसिक स्कूलों की कमियां 4 हफ्ते में सुधारें, सुप्रीमकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को लगाई फटकार

नई दिल्ली : प्राथमिक और मिडिल स्कूलों की खराब स्थिति पर सोमवार को सुप्रीमकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि अगर वह स्कूल दुरुस्त नहीं कर सकती तो ये खराब
शासन का संकेत है। कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार को चार सप्ताह में इलाहाबाद के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, शौचालय और सफाई आदि की कमी दूर करने का आदेश दिया है।
ये आदेश न्यायमूर्ति दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने गैर सरकारी संगठन हरिजन महिला की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किये। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने प्रदेश में प्राथमिक और मिडिल स्कूलों की जमीनी हकीकत खंगालने के लिए तीन वकीलों की एक कमेटी बनाई थी जिसे मौके का मुआयना करके रिपोर्ट सौपनी थी। कोर्ट ने सबसे पहले इलाहाबाद के बारे में रिपोर्ट मांगी थी।


हजारों प्रवक्ताओं के फर्जीवाड़े पर नकेल, एक ही प्रवक्ता ने कई बीटीसी कॉलेजों में करा रखा है पंजीकरण

इलाहाबाद : एक प्रमाणपत्र से कई मेडिकल स्टोर कई चलाने की बातें अब पुरानी हो चली हैं। शिक्षा महकमे में बड़ी संख्या में ऐसे प्रवक्ता हैं, जिन्होंने कई कॉलेजों में अपना पंजीकरण करा रखा है। ताज्जुब यह है
कि सभी कॉलेजों से उन्हें तय रकम भी मिल रही है और उन्हें कहीं जाना भी नहीं पड़ रहा। यह मामले जानकारी में आने के बाद फर्जीवाड़े पर कड़ा अंकुश लगने जा रहा है। सभी कॉलेजों से शिक्षकों का आधार कार्ड मांगा गया है, इसे अपलोड कराने की तैयारी है। इस कदम से हड़कंप है। कॉलेज प्रबंधक रिकॉर्ड देने में आनाकानी कर रहे हैं।
प्रदेश में बेसिक टीचर्स टेनिंग यानी बीटीसी के निजी कॉलेज लगातार खुलते जा रहे हैं, लेकिन वहां पर पठन-पाठन का स्तर का उसी रफ्तार से गिर रहा है। तमाम हिदायतों के बाद भी सुधार न होने पर पाठ्यक्रम में बदलाव हुए। ऐसा पाठ्यक्रम बनाया गया कि प्रशिक्षुओं को पढ़ना और शिक्षकों को पढ़ाना ही होगा। इसके बाद भी शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, बल्कि प्रशिक्षु सेमेस्टर परीक्षाओं में ही फेल होने लगे। हाल में ही बीटीसी 2013 का परीक्षा परिणाम इसका ताजा उदाहरण है। इधर अफसरों ने एनसीटीई से संपर्क करके उन कारणों की पड़ताल की कि आखिर बीटीसी कॉलेजों में पढ़ाई क्यों नहीं हो पा रही है। इसमें यह सामने आया कि एक ही प्रवक्ता कई कॉलेजों में पंजीकृत है और उसका पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। इन्हीं कथित प्रवक्ताओं के बलबूते बड़ी संख्या में निजी कॉलेज चल रहे हैं।
इस पर सख्त अंकुश लगाने के लिए यह योजना बनी कि सभी कॉलेजों के प्रवक्ताओं से आइडी यानी पहचान पत्र लेकर उनका आधार कार्ड एनसीटीई की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए तो वह जहां भी पंजीकृत होंगे तस्वीर सामने आ जाएगी। इसी योजना के तहत प्रवक्ताओं का रिकॉर्ड मांगा गया, लेकिन अभी तक गिने चुने कॉलेजों ने ही मुहैया कराया है। अधिकांश कॉलेज इसे देने में आनाकानी कर रहे हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि अभी कुछ कॉलेजों ने ही सूचनाएं भेजी हैं। सभी को जल्द रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।
इस कदम का यह असर
’ योग्यता रखने वाले नए युवाओं को कॉलेजों में पढ़ाने का मिलेगा मौका।
’ तमाम निजी कॉलेज बंदी के कगार पर होंगे, क्योंकि एक शिक्षक कई पंजीकृत।
’ शैक्षिक प्रपत्र एवं फोटो एनसीटीई की वेबसाइट पर आते ही पोल खुल जाएगी।
’ अफसरों ने कॉलेजों को 30 नवंबर तक आधार से लिंक करने को कहा।



 उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के लिए 15 नामों की सिफारिश

लखनऊ : उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में सदस्यों के पांच विज्ञापित रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों के चयन के लिए सोमवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सर्च कमेटी की बैठक हुई। बैठक में समिति ने पांच पदों के
सापेक्ष प्राप्त आवेदनों में से शार्टलिस्ट किये गए 15 नामों को सूची मुख्यमंत्री को भेजने का फैसला किया है। सिफारिश के तौर पर भेजे गए इन नामों में से किन्हीं पांच को उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का सदस्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री उनके नाम पर मुहर लगाएंगे। आयोग में सदस्यों के सभी छह पद खाली हैं। छठा पद हाल ही में रिक्त हुआ है। पहले से रिक्त पांच पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर उच्च शिक्षा विभाग ने आवेदन मांगे थे। विभाग को कुल 249 आवेदन प्राप्त हुए थे।


 पेंशनर्स को मिले उनका पूरा हक : राज्यपाल

लखनऊ : केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले सातवें वेतन आयोग के बराबर पेंशन व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की जाए। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन के महाधिवेशन में यह मांगे रखी गईं थीं। कार्यक्रम में पहुंचे
राज्यपाल ने इस पर सहमति जताते हुए सरकार से बात करने का आश्वासन दिया। विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित 60वें महाधिवेशन में मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि यदि सेवानिवृत्ति के बाद भी ये लोग समाज सेवा का कार्य करते हैं, तो आपको, आपके परिवार को और समाज को इसका लाभ होगा। नई पीढ़ी का सही और प्रमाणिकता से मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा कि जो लोग सेवा में हैं, उन्हें यह मानना चाहिए कि सेवा का काल जन समस्याओं को दूर करने के लिए होता है। अपनी सेवा के माध्यम से अपने दायित्व के प्रति न्याय करें। सेवानिवृत्ताें का संगठन सेतु की तरह काम करे। उन्होंने पेंशनर्स को पूरा हक दिए जाने की बात भी कही। कार्यक्रम में अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति कमलेश्वर नाथ ने कहा कि सेवानिवृत्त लोगों के लिये व्यस्त रहना ही सबसे बड़ा मंत्र है। अपने कार्यक्षेत्र को विस्तृत करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन सेवानिवृत्त लोगों की पीड़ा को समङो। अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति एससी वर्मा ने कहा कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के संतुलन से जीवन को स्वस्थ बनाया जा सकता है। सेवानिवृत्त लोग अपने अनुभव का सदुपयोग करते हुए समाज सेवा में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि सुशासन से भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है। राज्यपाल ने इस अवसर पर 80 वर्ष की आयु पूरी करने वाले संगठन के आजीवन सदस्यों को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। सेवानिवृत्त इंजीनियर आरएस त्रिपाठी की पुस्तक ‘कवितापत्रदिकं’ का विमोचन किया और संगठन की स्मारिका का भी लोकार्पण किया। संगठन के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आइएएस आरएन त्रिपाठी ने प्रदेश सरकार से मांग की कि रिटायर कर्मचारियों और अधिकारियों को सरकार यदि चाहे तो संविदा कर्मियों के स्थान पर सेवा करने का अवसर दे सकती है। हम लोग अनुभवी हैं और उनसे अच्छा कार्य कर सकेंगे। संविदाकर्मी नियुक्ति के कुछ समय बाद नियमित किए जाने की मांग कर सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करते हैं।


अब खत्म हुआ लैपटॉप का इंतजार, दो दिसंबर को राजधानी में मेधावियों को सौगात देंगे सीएम, लखनऊ के बाद अन्य जिलों में भी बंटेंगे लैपटॉप

लखनऊ : राज्य सरकार की ओर से लैपटॉप पाने के लिए बेचैन मेधावियों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। वल्र्ड कंप्यूटर लिटरेसी डे के मौके पर दो दिसंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राजधानी के मेधावी छात्र-छात्रओं को सरकार
की यह सौगात भेंट कर बहुप्रतीक्षित लैपटॉप वितरण कार्यक्रम का आगाज करेंगे। लैपटाप वितरण कार्यक्रम मुख्यमंत्री के नये कार्यालय लोक भवन में आयोजित होगा। लखनऊ के बाद अन्य जिलों में भी लैपटॉप बांटे जाएंगे।1राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2015 व 2016 में यूपी बोर्ड, सीबीएसई व आइएससी/आइसीएसई बोर्ड, माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद और मदरसा बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट या इनके समकक्ष परीक्षाएं उत्तीर्ण करने वाले मेधावी छात्र-छात्रओं को लैपटॉप बांटे जाने हैं। मेधावियों को बांटने के लिए लगभग 1.43 लाख लैपटॉप की आपूर्ति यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन को की जा चुकी है। 47 हजार लैपटॉप की पहली खेप में प्राप्त हुए नये लैपटॉप की खूबियों को मुख्यमंत्री ने सात अक्टूबर को देखा-परखा भी था। छात्र-छात्रएं भी बेसब्री से सरकार की इस सौगात का इंतजार कर रहे हैं। उस समय माध्यमिक शिक्षा विभाग को संकेत मिला था कि दशहरे के बाद मुख्यमंत्री लैपटॉप वितरण की शुरुआत कर सकते हैं लेकिन सरकार और यादव परिवार में चल रहे घमासान के कारण ऐसा हो नहीं सका था।1माना जा रहा है कि अपने कार्यकाल के अंतिम साल में सरकार अपनी फ्लैगशिप स्कीम के तहत छात्रओं को जोरशोर से लैपटॉप बांटेगी।


 आरओ/एआरओ परीक्षा में इलाहाबादी प्रतियोगी चमके, पहली रैंक पर रहे गाजीपुर के विपुल ’ वर्ष 2014 में हुई परीक्षा का आया परिणाम

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा घोषित वर्ष 2014 के समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी के परिणाम में बड़ी संख्या में छात्रों ने कामयाबी हासिल की। 1पहली रैंक पर रहे विपुल कुमार गाजीपुर के मूल
निवासी हैं। इनको यह कामयाबी लंबे प्रयास के बाद मिली है। उन्होंने इलाहाबाद विवि से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। इनके पिता स्वर्गीय बीके शर्मा बिहार सरकार में चिकित्सक थे। अपनी सफलता का श्रेय ये साथियों और शिक्षकों को देते हैं। 1दूसरे स्थान पर दीपक कुमार ने बाजी मारी है। उन्होंने इलाहाबाद विवि से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने पूर्वाचल विवि से राजनीतिशास्त्र में परास्नातक किया है। मूलरूप से सुल्तानपुर निवासी दीपक वर्तमान में भारत सरकार के एक विभाग में मऊ में प्रशासनिक अधिकारी पद पर नियुक्त हैं। इनका कहना है कि असफलता से जो नहीं घबराता मंजिल उन्हीं को मिलती है। 1तीसरी रैंक प्राप्त विजय कुमार तिवारी मूलरूप से महाराजगंज के सिसवा बाजार के रहने वाले हैं। वे इलाहाबाद विवि से स्नातक और हंिदूी विषय में पीजी हैं। हंिदूी में जेआरएफ विजय कुमार ने दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की है। 1लड़कियों में पहली रैंक प्राप्त करने वाली कल्पना जायसवाल वर्तमान में इलाहाबाद में सेवायोजन कार्यालय में सहायक सेवायोजन अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। मूलरूप से कुशीनगर निवासी कल्पना ने इलाहाबाद विवि से वर्ष 2008 में अंग्रेजी साहित्य से परास्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की है। सहायक सेवायोजन अधिकारी से पूर्व ये सहायक शिक्षिका रहीं हैं। ओवरआल इनकी रैंक दसवी हैं। 1इसी प्रकार लखनऊ निवासी शिवांगी शुक्ल ने लड़कियों की श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इन्होंने लखनऊ से ही इंटीग्रल विवि से एमएससी पूरी की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय ये अपने पिता डा. प्रमोद शुक्ल को दिया है। इनका कहना है कि भगवान पर भरोसा करें और सही दिशा में मेहनत करें तो मंजिल जरूरी मिलती है। जरूरी है कि लक्ष्य बनाकर पढ़ाई की जाए। हंडिया के ग्राम जरावं, निवासी उपेंद्र कुमार उपाध्याय ने भी सफलता हासिल की है। इनका चयन वर्ष 2013 में लोअर पीसीएस के अंतर्गत मार्केटिंग अधिकारी पद पर हो चुका है। पिता त्रिलोकी नाथ उपाध्याय कृषक एवं माता सरस्वती देवी ग्रहणी हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय ये छोटे भाई जितेंद्र उपाध्याय को देते हैं। सफलता के क्रम में शरद कश्यप ने भी बाजी मारी है। वर्तमान में वे हापुड़ में बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर कार्यरत है।



नियुक्ति के लिए प्रशिक्षुओं ने दिया धरना, प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर मौलिक नियुक्ति दिए जाने की मांग को लेकर प्रशिक्षु शिक्षकों ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर सोमवार को धरना

प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर मौलिक नियुक्ति दिए जाने की मांग को लेकर प्रशिक्षु शिक्षकों ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर सोमवार को धरना दिया। प्रशिक्षु शिक्षकों ने शासन स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के
निर्णय का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया।

आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि कोर्ट ने 862 अभ्यर्थियों को तदर्थ शिक्षक के रूप में नियुक्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने आदेश का पालन करते हुए छह माह का प्रशिक्षण कराया और परीक्षा नियामक आयोग द्वारा परीक्षा भी कराई गई। इसमें 839 प्रशिक्षु को सफल घोषित किया गया। बावजूद इसके अब तक सफल प्रशिक्षुओं को विद्यालयों में मौलिक नियुक्ति नहीं दी जा रही है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और शासन स्तर पर टालमटोल किया जा रहा है।

प्रशिक्षु प्रभात मिश्र ने कहा कि निदेशक हर बार केवल आश्वासन देते हैं लेकिन अब आश्वासन से कुछ नहीं होगा। जब तक अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं मिलेगी धरना चलता रहेगा।


30 को लगेगा रोजगार मेला, बेरोजगारों को मिल सकेगी नौकरी
क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में 30 नवंबर को रोजगार मेला का आयोजन होगा। इसमें वाराणसी की कंपनी शिवशक्ति बायो टेक्नोलॉजी लि., सेल्स एक्जीक्यूटिव पद पर अभ्यर्थियों का चयन करेगी
सेवायोजन रमाशंकर ने बताया कि 20 से 32 साल तक के इंटर पास पुरुष अभ्यर्थियों को वरीयता दी जाएगी। इसके अलावा कापरेरेट सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज वाराणसी द्वारा सिक्योरिटी गार्ड, सुपरवाइजर, एरिया आफिसर पद पर नियुक्ति की जाएगी। इसमें हाईस्कूल, इंटर व स्नातक किए 20 से 40 साल के पुरुष अभ्यर्थियों का चयन होगा।
हषरेल्लास से मनी जयंती
इलाहाबाद : केपी ट्रेनिंग कालेज में कुलभाष्कर जयंती हषरेल्लास से मनाई गई। सोमवार को कालेज परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. सुजाता रघुवंश ने कहा कि व्यक्ति व समाज का विकास शिक्षा से संभव है। केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष चौ. राघवेंद्रनाथ सिंह ने कुलभाष्कर के कृतित्व-व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शक्ति शर्मा ने किया। आभार डॉ. शरद श्रीवास्तव ने ज्ञापित किया। प्राचार्य डॉ. शोभा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संयोजन किया।



एसएससी के कई रिजल्ट एक हफ्ते में होंगे जारी

 इलाहाबाद : कर्मचारी चयन आयोग की कई प्रमुख परीक्षाओं के परिणाम एक हफ्ते में जारी हो जाएंगे। इसमें संयुक्त हायर सेंकेंडरी स्तरीय परीक्षा (सीएचएसएल) का दूसरा चरण भी है। आयोग की ओर से दी गई जानकारी
के अनुसार स्टेनोग्राफर ग्रेड-सी और डी परीक्षा-2015 का परिणाम 30 नवंबर की सायं घोषित किया जाएगा। इसी तरह स्टेनोग्राफर ग्रेड-सी और डी परीक्षा-2016 का परिणाम एक दिसंबर को घोषित किया जाएगा। कंबाइंड हायर सेंकेडरी लेवल (दूसरा चरण)-2015 का परिणाम दो जनवरी को सायंकाल घोषित किए जाने की संभावना है। 1कैंपस ड्राइव में पांच का चयन : यूनाइटेड ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट में कैंपस ड्राइव का आयोजन किया गया। एयरटेल कंपनी ने 25 और 26 नवंबर को चयन प्रक्रिया की। इसमें एमबीए के 25 युवक-युवतियों ने भाग लिया। एयरटेल ने पांच युवाओं का तीन लाख के पैकेज पर चयन किया है। इस मौके पर प्रिंसिपल प्रोफेसर केके मालवीय, वाइस प्रेसीडेंट गौरव गुलाटी और वंश गुलाटी ने चयनित छात्रों को बधाई दी।


तकनीक से भी नहीं रुकी लेटलतीफी, हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण तय समय पर पूरा नहीं

इलाहाबाद : यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए केंद्र निर्धारण समय पर पूरा कराने का कोई भी कदम कारगर नहीं हो रहा है। पंजीकरण एवं परीक्षा फार्म जैसे अहम कार्य समय पर पूरा करा लेने वाला महकमा केंद्र निर्धारण में फिर असफल हो गया है। केंद्र बनाने की अंतिम तारीख बढ़ चुकी है, लेकिन जिस गति से कार्य हो रहा है उससे दिसंबर के पहले पखवारे में कार्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है। 1माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2017 के लिए केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। इस बार कंप्यूटर के जरिए यूपी बोर्ड मुख्यालय पर ही केंद्र निर्धारण होना था, लेकिन अंतिम समय में शासन ने तकनीक का साथ तो लिया, लेकिन इसमें जिला विद्यालय निरीक्षकों को पहले की तरह अधिकार सौंप दिए। कहा गया कि बोर्ड इसके लिए साफ्टवेयर तैयार कराएगा, जो बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड होगा। उसी पर जिला विद्यालय निरीक्षक केंद्रों की सूची अपलोड कराएंगे। इसे जिलाधिकारी से लेकर प्रमुख सचिव तक देख सकेंगे। शासन ने केंद्र स्थापना नीति घोषित करते हुए पूरा कार्यक्रम भी जारी किया था, इसमें 28 नवंबर तक केंद्र निर्धारण पूरा किए जाने का निर्देश था। अब तक जिला विद्यालय निरीक्षकों ने सभी जिलों की सूचनाएं तक अपलोड नहीं की हैं। सूत्रों की मानें तो अभी आधे जिले ही तैयारियां पूरी करते दिख रहे हैं। पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई बैठक में केंद्र निर्धारण की समय सीमा बढ़ाकर चार दिसंबर कर दी गई है। साफ कहा गया है कि इस समय में हर हाल में काम पूरा हो जाए, लेकिन जिस तरह से तैयारियां चल रही हैं, उसे देखते हुए ऐसे आसार कम ही है। शासन ने सख्ती बरती तो दिसंबर का पहला पखवारा पूरा होने तक प्रक्रिया भी पूरी हो सकती है। असल में इस कार्य में लेटलतीफी का कारण जिला विद्यालय निरीक्षक ही हैं उनकी अपनी ‘शर्ते’ परीक्षा नीति पर भारी पड़ रही हैं। इसीलिए तकनीक भी फेल रही है। यूपी बोर्ड में लाखों छात्र-छात्रओं का कक्षा 9 व 11 का पंजीकरण एवं हाईस्कूल व इंटर के परीक्षा फार्म ऑनलाइन भरे जाते हैं। इसमें डीआइओएस की भूमिका सीमित होने से समय पर काम पूरा होता आ रहा है। हर साल की तरह केंद्र निर्धारण में अफसरों का पुराना रवैया ही बरकरार है। खास बात यह है कि विभागीय मंत्री एवं शासन के अफसर भी इस मुद्दे पर कड़े निर्देश देने से बच रहे हैं। सचिव शैल यादव ने कहा कि शासन ने जो समय सीमा तय की है उसी में केंद्र निर्धारण हर हाल में पूरा हो।


 कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट, टाट बोरे पर क्यों बैठते हैं बच्चे

 नई दिल्ली : सुप्रीमकोर्ट कमेटी ने इलाहाबाद के स्कूलों का दौरा कर दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दो दिन 24 और 25 नवंबर को उन्होंने कुल 35 स्कूलों का दौरा किया। इन स्कूलों में ग्रामीण, शहरी और अर्धशहरी स्कूल थे। कमेटी
ने कहा कि अर्ध शहरी स्कूलों के पड़ोस मे बिजली होने के बावजूद ज्यादातर स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं हैं। जबकि ये स्कूल इलाहाबाद शहर से महज 15 - 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। शहरी, अर्ध शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पाइप से पानी सप्लाई का कोई कनेक्शन नहीं है। स्कूलों में पीने के पानी का एकमात्र जरिया हैंडपंप हैं। लेकिन वो भी बहुत बार खराब रहते है और उन्हे जल्दी ठीक कराने का कोई तंत्र नहीं है। अर्ध शहरी और ग्रामीण इलाकों के स्कूल साफ सफाई के लिए पूरी तरह ग्राम प्रधान की ओर से स्टाफ मुहैया कराने पर निर्भर हैं। यहां तक कि शौचालय की सफाई भी। सफाई स्टाफ स्कूलों में सफाई के लिए रोजाना नहीं आता। ऐसे मे प्रधानाचार्य अपने पैसे पर शौचालय व स्कूल की प्राइवेट स्टाफ से सफाई कराते हैं। यहां तक कि सफाई के लिए फिनायल और हारपिक आदि भी वे स्वयं के पैसे से मंगाते हैं। स्कूलों में लड़के और लड़कियों के शौचालय पर्याप्त नहीं हैं। कुछ स्कूलों में गंदगी के कारण शौचालय प्रयोग करने लायक नहीं हैं। ज्यादातर स्कूलों में नये शौचालय बनवाये जाने की जरूरत है। अधिकतर जगह शौचालय बनवाने के लिए स्कूलों में जगह है।


राजपत्रित अधिकारी बने आबकारी निरीक्षक
   
लखनऊ : आबकारी निरीक्षकों को सोमवार से शासन ने राजपत्रित पद की प्रतिष्ठा दे दी। इससे 759 आबकारी निरीक्षकों में खुशी है। वर्ष 2001 से उत्तर प्रदेश आबकारी निरीक्षक संघ इसकी मांग कर रहा था। आबकारी अनुभाग एक के उपसचिव सुनील कुमार पाण्डेय ने यह आदेश जारी किया है।
आदेश में लिखा गया है कि राज्यपाल ने इस शर्त पर यह स्वीकृति प्रदान की है कि भविष्य में इस पद पर उच्च वेतनमान की मांग आबकारी निरीक्षकों की ओर से नहीं की जाएगी। आबकारी निरीक्षक वेतन बैंड 9300-34800 रुपए और ग्रेड पे 4600 रुपए पर तैनात हैं।
उधर, आबाकरी निरीक्षक संघ के अध्यक्ष एएन सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से दिए गए इस तोहफे से राजस्व की वृद्धि में अहम भूमिका निभाने में वाले आबकारी निरीक्षक प्रति शपथ पत्र लगा सकेंगे। साथ ही उनको एनडीपीएस के मुकदमों में मजबूत धरपकड़ का नया दायित्व भी हासिल हो जाएगा।


आठ स्कूलों के खिलाफ सीबीएससी और आईसीएसई को पत्र
   
लखनऊ : जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शहर के आठ निजी स्कूलों पर कार्रवाई के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) को पत्र लिखा है। इनमें, सिटी इंटरनैशनल स्कूल इंदिरानगर, डॉ. वीरेंद्र स्वरूप कॉलेज महानगर, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल समस्त ब्रांच, एग्जॉन मॉन्टेसरी स्कूल, नवयुग रेडियंस स्कूल राजेंद्र नगर, दिल्ली पब्लिक स्कूल इंदिरानगर, सेंट मैरी इंटर कॉलेज जानकीपुरम और सेंट मैरी इंटर कॉलेज मटियारी शामिल है।
शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों के दाखिले न लिए जाने के कारण ये कार्रवाई की गई। बोर्ड से इन सभी स्कूलों को एडमिशन लेने के निर्देश देने साथ ही कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर निशुल्क दाखिले की व्यवस्था है।


 सचिवालय सीधी भर्ती संघ ने वेतन कमेटी से विस्तृत चर्चा के लिए समय मांगा
 
राज्य मुख्यालय। यूपी सचिवालय सेवा सीधी भर्ती संघ ने वेतन कमेटी अध्यक्ष जी.पटनायक से उनके ज्ञापन पर विस्तृत चर्चा के लिए समय देने की मांग की है।
संघ के अध्यक्ष आशुतोष चंद्र पांडेय और वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशिकांत शुक्ला ने वेतन कमेटी अध्यक्ष से कहा है कि प्रदेश के विभिन्न सेवाओं के पदों जैसे सब रजिस्ट्रार और वाणिज्य कर अधिकारी आदि (जो सचिवालय के समीक्षा अधिकारी से निम्न या समकक्ष थे) की ग्रेड पे पहले ही अनौचित्यपूर्ण ढंग से बढ़ा दी गई है। जिससे सचिवालय सेवा संवर्ग के पदों की ग्रेड पे में विसंगति उत्पन्न हो गई। इस समस्या एवं वेतन विसंगति के निराकरण के लिए सचिवालय सेवा के समीक्षा अधिकारी की ग्रेड पे 5400 रुपये, अनुभाग अधिकारी की ग्रेड पे 6600 रुपये और अनु सचिव की ग्रेड पे 7600 रुपये की जाए।
इसी तरह उप सचिव, संयुक्त सचिव और विशेष सचिव पदों की ग्रेड पे क्रमश: उच्चीकृत करते हुए 10 हजार रुपये की जाए। साथ ही सचिवालय सेवा संवर्ग का काडर रिव्यू करते हुए सचिवालय के समूह-क (क्लास वन) के अधिकारियों के पदों में वृद्धि की जाए।



तीन साल से कर रहे शिक्षण कार्य, भविष्य अधर में
 
इलाहाबाद : एकेडमिक मेरिट के आधार पर यूपी में चयनित शिक्षकों का भविष्य तीन साल की नौकरी के बाद भी सुरक्षित नहीं है। एकेडमिक मेरिट के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं पर कोई निर्णय नहीं हो सका, लेकिन अभी भी तकरीबन एक लाख शिक्षकों की नौकरी से खतरा टला नहीं है।
दरअसल शिक्षक भर्ती के लिए पहली बार आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2011 में कथित धांधली के आरोप पर समाजवादी पार्टी ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी से पूरे प्रकरण की जांच करवाई। इसके बाद शिक्षकों की भर्ती एकेडमिक मेरिट के आधार पर करने के लिए अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में 15वां संशोधन कर दिया गया।
इसके आधार पर बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी या उर्दू बीटीसी और टीईटी पास अभ्यर्थियों के लिए 9770 सहायक अध्यापकों की भर्ती 8 अक्तूबर 2012 में निकाली गई। इसमें चयनित शिक्षक फरवरी 2013 से पढ़ा रहे हैं। इसके बाद फिर 16वां संशोधन करते हुए 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के लिए दिसंबर 2012 में विज्ञापन जारी किया।
हालांकि हाईकोर्ट ने 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती टीईटी मेरिट पर करने का निर्देश दिया और 15वां संशोधन 20 नवंबर 2013 को निरस्त कर दिया। हालांकि संशोधन निरस्त होने से पहले 9770, 10800, 29334, 4280, 10000 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। प्रशिक्षु शिक्षक मामले में एकेडमिक मेरिट व्यवस्था निरस्त होने के बाद भी सरकार ने 15000, 3500 उर्दू और 16,448 बीटीसी भर्ती का विज्ञापन जारी किया। ये सारी भर्तियां भी पूरी हो चुकी है।
इस बीच टीईटी मेरिट समर्थकों ने शिक्षक भर्ती में टीईटी अंकों को वरीयता देने के लिए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं कर दी। चूंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है इसलिए हाईकोर्ट ने 24 नवंबर को सुनवाई के दौरान इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण खतरा बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए हैं चार सवाल
देश की शीर्ष अदालत ने यूपी की शिक्षक भर्ती में नियमों को लेकर दो नवंबर 2015 को चार सवाल खड़े किए थे। इस मामले की सुनवाई लंबित है।
-क्या शिक्षक भर्ती के लिए जारी एनसीटीईटी की गाइडलाइन मनमानी है
-क्या टीईटी मेरिट ही एकमात्र चयन का आधार हो सकता है
-क्या हाईकोर्ट द्वारा 15वां संशोधन निरस्त किया जाना उचित है
-एनसीटीई की गाइडलाइन में टीईटी अंकों को वरीयता देने का क्या अर्थ है



वाराणसी समेत दस जिलों की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 6 जनवरी से
   
वाराणसी  : वाराणसी परिक्षेत्र के तहत आने वाले वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल के दस जिलों की यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं छह से 20 जनवरी के बीच होंगी। अन्य मंडलों की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 22 दिसम्बर से आरंभ हो रही हैं।
बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव कामता राम पाल ने बताया कि इन जिलों के राजकीय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में इंटरमीडिएट के अनिवार्य विषय, खेल एवं शारीरिक शिक्षा की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 20 जनवरी तक करानी होगी। हाईस्कूल की प्रयोगात्मक परीक्षाएं आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर होंगी। हाईस्कूल के व्यक्तिगत परीक्षार्थी भी निर्धारित तिथि तक अग्रसारण केंद्र के केंद्र व्यवस्थापक से सम्पर्क कर प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होंगे।
वेबसाइट पर अपलोड करेंगे अंक
हाईस्कूल की प्रयोगात्मक परीक्षा, नैतिक खेल एवं शारीरिक शिक्षा, इंटरमीडिएट की खेल एवं शारीरिक शिक्षा के प्राप्तांक विद्यालयों के प्रधानाचार्य के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
परीक्षकों को नियुक्तिपत्र डीआईओएस देंगे
बोर्ड द्वारा तय किए गए परीक्षकों के नियुक्ति पत्र पंजीकृत डाक से न भेजकर सीधे जनपदों के जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजा जाएगा। वहीं से नियुक्तिपत्र का वितरण होगा। यदि कोई ऐसा शिक्षक परीक्षक नियुक्त हो गया हो जो अर्हता नहीं रखता उसकी सूचना बोर्ड को देकर नियुक्ति पत्र को वापस कर दिया जाएगा।



आजमगढ़ : शासनादेश निरस्त होने तक जारी रहेगा एडीओ, सचिव, सफाईकर्मियों का आंदोलन
   
 आजमगढ़ : विकास भवन के समक्ष सोमवार को ग्राम विकास विभाग के अधीन रह कर कार्य करने संबंधी शासनादेश के निरस्तीकरण सहित तीन सूत्री मांगों को लेकर पंचायती राज परिषद के तत्वावधान में एडीओ,सचिव और सफाई कर्मचारियों ने धरना दिया। इस दौरान जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चेतावनी दी कि शासनादेश निरस्त होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के अगले चरण में पांच दिसंबर को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
सहायक विकास अधिकारी संघ के जिला अध्यक्ष मक्कल यादव ने कहा कि उनकी मांगों में प्रमुख रूप से एक अगस्त को जारी शासनादेश निरस्त करने, ग्राम विकास विभाग से पंचायती राज विभाग को मुक्त करने, एडीओ पंचायत का अलग से कार्यालय और रिक्त ग्राम पंचायत अधिकारी पदों पर उच्च शिक्षा प्राप्त सफाई कर्मचारियों की प्रोन्नति की मांग शामिल है।
ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) संघ के जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने कहा कि एक अगस्त को जारी शासनादेश के तहत पंचायती राज विभाग के अधिकारियों,कर्मचारियों को ग्राम विकास विभाग के अधीन किया जाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एडीओ पंचायत संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि
जब तक एक अगस्त का शासनादेश निरस्त नहीं हो जाता है,तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अंत में सफाई कर्मचारी ऋषिपाल सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। धरने में प्रमुख रूप से जयप्रकाश सिंह, आत्मा तिवारी, सुभाष चंद्र शर्मा, टीपी सिंह, धर्मेंद्र यादव, रामाश्रय, शिवप्रसाद तिवारी, इंद्रसेन यादव, फकरे आलम, सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सीपी यादव, नवीन चतुर्वेदी, शीला, शकुंतला, बबली, निशा, सुलेखा यादव,चंद्रकला आदि ने भाग लिया। अध्यक्षता एडीओ पंचायत मक्कल यादवव् ने की और संचालन अमरजीत सिंह ने किया।



 मैनपुरी डीआईओएस ने 65 कालेजों को जारी किए नोटिस
   
मैनपुरी : डीआईओएस ने जनपद के 65 वित्तविहीन कालेजों की मान्यता समाप्त की कार्रवाई करने का नोटिस जारी किया है। इन कालेजों ने मानदेय के लिए शिक्षकों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया है। 30 नवंबर तक यदि शिक्षकों का विवरण नहीं मिला तो विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।
शासन ने वित्तविहीन कालेजों के शिक्षकों को विशेष प्रोत्साहन मानदेय भुगतान का निर्णय लिया है। जनपद के 217 कालेज इस प्रोत्साहन मानदेय की श्रेणी में आ रहे थे। जिन्हें 9 जून 2016 को आदेश आने के बाद कईबार लिखित रूप में मोबाइल से तथा समाचार पत्रों के माध्यम से डीआईओएस ने शिक्षकों की फाइलें जमा करने के निर्देश दिए। 152 कालेजों के शिक्षकों को मानदेय जारी भी किया जा चुका है। लेकिन 65 कालेजों ने अभी तक अपना विवरण उपलब्ध नहीं कराया है। डीआईओएस आरपी यादव ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि इन कालेजों में शिक्षकों को उत्पीड़न किया जा रहा है। जिसे देखते हुए इन कालेजों की मान्यता प्रत्याहरण करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
30 तक जमा नहीं किए आवेदन तो बोर्ड को लिखा जाएगा पत्र
मैनपुरी। डीआईओएस आरपी यादव ने कहा कि शासन की यह प्रमुखता वाली योजना है। इसमें यदि छूटे हुए कालेजों के शिक्षकों ने 30 नवंबर तक शिक्षकों के सारे विवरण तैयार कर उनके कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराये तो उनकी मान्यता प्रत्याहरण के लिए बोर्ड को लिखा जाएगा। प्रोत्साहन मानदेय के लिए नहीं भेजी हैं फाइलें 30 तक दिया अंतिम मौका नहीं तो समाप्त होगी मान्यता



 न आवेदन न इंटरव्यू और मिल गई नौकरी
   
गोरखपुर : बेसिक शिक्षा विभाग का एक नया कारनामा सामने आया है। एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों के चार खाली पदों में से तीन पर ऐसे लोगों की नियुक्ति कर दी गई जिन्होंने इंटरव्यू तो दूर आवेदन तक नहीं किया था। नियम-कायदे को ताक पर रखकर नौकरी पाये इन शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाना भी शुरू कर दिया। अचानक आई एक शिकायत ने इस गड़बड़झाले को सामने ला दिया है।
अब अधिकारी जांच और कार्यवाही का हवाला दे रहे हैं जबकि इस गड़बड़झाले के लिए उनके अपने विभाग के लोग जिम्मेदार हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित जनता पूर्व माध्यमिक विद्यालय हरिहरपुर में चार शिक्षक पद रिक्त थे। जिस पर नियुक्ति के लिए विभाग ने आवेदन मांगा। 24 लोगों ने आवेदन किया और इंटरव्यू भी दिया लेकिन जब सूची तैयार हुई तो उसमें 24 की जगह सिर्फ 19 का ही नाम प्रकाशित हुये। इन 19 में से दो शिक्षकों को चयनित किया गया और दो को प्रतीक्षा सूची में रखा गया।
लेकिन जब चारों पदों पर ज्वाइनिंग हुई तो चयनित शिक्षकों में से सिर्फ एक ने ज्वाइन किया। शिक्षक बनने वालों में से तीन ऐसे थे जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था। उनके नाम न तो आवेदन करने वालों की सूची में थ। न इंटरव्यू के बाद बनी 19 की सूची में। इतना ही नहीं विभागीय अधिकारी ने एक ऐसे शिक्षक को बाहर का रास्ता दिखा दिया जो इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल होकर चयनित हुआ था। उसकी जगह एक महिला को ज्वाइन कराया गया।
मामले की जानकारी होने पर स्कूल प्रबंध समिति ने इसकी जानकारी बीएसए को दी। वहां से कोई कार्यवाही नहीं हुई तो प्रबंध समिति ने एडी बेसिक से शिकायत की। अब एडी बेसिक ने इस पर जांच बिठा दी है।
जांच कराई जा रही है। दस्तावेजों को देखकर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया ही फर्जी लग रही है। जांच में शिकायत की पुष्टि होने पर नियुक्तियों को निरस्त कर दोबारा आवेदन मंगाकर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
डा.सत्य प्रकाश त्रिपाठी, एडी बेसिक सप्तम मण्डल



व्हाट्सएप पर पीएम मोदी का उपहास उड़ाया, सेक्रेटरी सस्पेंड
   
बरेली : स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के व्हाट्सएप ग्रुप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उपहास उड़ाने वाला मीरगंज का सेक्रेटरी सोमवार को सस्पेंड हो गया। डीपीआरओ ने सेक्रेटरी का स्पष्टीकरण खारिज कर दिया। वहीं सीडीओ ने पीएम पर टिप्पणी के मामले में सेक्रेटरी को माफ करने से इंकार दिया।
पिछले सप्ताह मीरगंज के सेक्रेटरी हिफाजत उल्ला खां ने एसबीएम के व्हाट्स ग्रुप पर पीएम मोदी, मुकेश अंबानी और टीना अंबानी का फोटो पोस्ट किया था। फोटो में मोदी मुकेश और टीना अंबानी से हाथ मिला रहे हैं। हिफाजत उल्ला ने मोदी की तरफ इशारा करते हुए लिखा था ‘और कोई आदेश भाजी जी जियो लांच करा दिया। काला धन सफेद करा दिया। आरबीआई गर्वनर आपके जानकार को बना दिया। और कोई सेवा हो तो बताना। फोटो पर जो कमेंट किया उसको लेकर ग्रुप पर ही बहस छिड़ गई थी। ग्रुप से डीएम और सीडीओ के जुड़े होने की वजह से मामला एकदम अफसरों तक पहुंच गया। कमेंट को लेकर कई अधिकारियों ने ग्रुप पर ही आपत्ति दर्ज कराई थी। ग्रुप सिर्फ एसबीएम के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी के लिए बनाया गया था।
इस तरह की पोस्ट पर डीएम पंकज यादव ने नाराजगी जताते हुए सीडीओ शिव सहाय अवस्थी को कार्रवाई के आदेश दिए थे। सीडीओ के आदेश पर डीपीआरओ ने पिछले सप्ताह सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने को कहा था। सोमवार को हिफाजत उल्ला खां जवाब लेकर डीपीआरओ के पास पहुंचा। जवाब में गलती से ग्रुप में प्रधानमंत्री का फोटो पोस्ट होने की बात कही गई। डीपीआरओ ने सेक्रेटरी को सीडीओ के सामने पेश कर दिया। सीडीओ ने सेक्रेटरी के तर्क को खारिज कर डीपीआरओ को कार्रवाई के आदेश दे दिए।
पीएम का पद संवैधानिक है। सरकारी कर्मचारी पीएम पर कमेंट नहीं कर सकता। सचिव ने मर्यादा तोड़ी है। व्हाट्सएप पर पीएम के बारे में कमेंट करने वाले सेक्रेटरी को सस्पेंड कर जांच शुरू कर दी है।
- टीसी पांडेय, डीपीआरओ


ऑनलाइन नहीं डला पैसा, मालामाल हुआ वजीफे का खाता
    
मुरादाबाद : स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले जिन बच्चों का बैंक में खाता सरकार की तरफ से मिलने वाली छात्रवृत्ति के लिए खुलवाया गया था। अमूमन, उस खाते में तभी पैसे आते थे जब सरकार की तरफ से वजीफे की रकम उनके खाते में डाली जाती थी। जिसके कुछ ही दिन बाद इस खाते में कुछ नहीं बचता था। साल के ज्यादातर दिनों में बच्चों के वजीफा खाते का बैलेंस जीरो ही रहता था, लेकिन नोटबंदी के बाद इन खातों में भी धन की बरसात हो गई है। बैंक कर्मचारी काउंटर पर अपने खाते में रकम खुद जमा कराने के लिए आने वाले बच्चों को देखकर हैरान हो रहे हैं। वहीं, बैंक अधिकारी ये बात खुलकर कह रहे हैं कि आयकर विभाग वजीफे के खातों पर भी बराबर नजर रखे हुए है और जिन बच्चों का ये खाता है उन्हें नोटिस भेजकर खाते में इतनी ज्यादा रकम जमा करने के बारे में शर्तिया तौर से पूछताछ की जाएगी। छात्रवृत्ति खाते ज्यादातर सरकारी बैंकों में हैं। एसबीआई, इलाहाबाद बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि बैंकों में छात्रवृत्ति के खाते बड़े पैमाने पर खुले हुए हैं। इन खातों में बहुत ज्यादा रकम जमा की जा रही है। चूंकि, खाता स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों का है लिहाजा, बच्चे खुद अपने खाते में रकम जमा करने को बैंक पहुंच रहे हैं। शाखाओं में काउंटर पर मौजूद कई कर्मचारियों ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि कोई बच्चा बीस तो कोई चालीस हजार रुपए रोजाना जमा करने के लिए पहुंच रहा है। पचास हजार रुपए तक की रकम छात्रवृत्ति के खाते में एक बार में जमा कराई जा रही है। जिसके चलते वजीफे के जिन खातों का बैलेंस ज्यादातर समय में जीरो से आगे बढ़ ही नहीं पाता था उनमें अब हजारों और लाखों रुपए जमा हो गए हैं। बैंक कर्मचारियों का ये भी कहना है कि बच्चों के हाथ में जमा करने के लिए इतनी रकम देखकर उन्हें हैरानी हो रही है और वह कई बच्चों को यह भी कह रहे हैं कि अपने खाते में इतना ज्यादा पैसा जमा करना उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। यह बात सुनकर कुछ बच्चे और उनके अभिभावक बिना पैसे जमा कराए बैंक से वापस भी लौट जा रहे हैं, लेकिन छात्रवृत्ति के खातों में धन की बरसात का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। '' जिस तरह जनधन खाते में बड़े पैमाने पर रकम जमा हो रही है उसी तरह छात्रवृत्ति के खातों में भी पैसा बरस रहा है। साफ झलक रहा है कि इन खातों का इस्तेमाल कालेधन को सफेद बनाने में किया जा रहा है। आयकर विभाग को हर खाते में रुपए जमा होने की जानकारी बराबर मिल रही है। उचित समय पर विभाग की तरफ से खाताधारकों को नोटिस भेजा जाएगा। प्रत्येक खाताधारक को यह जवाब देना होगा कि उसके पास इतनी रकम कहां से आई है।'' तपेश्वर प्रसाद, अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक

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