Saturday, 1 April 2017

​नये सत्र में बच्चे बीन रहे हैं महुआ, अध्यापक बच्चों के लौटने का कर रहे इंतज़ार 


1 अप्रैल 2017
जुगैल से राकेश चौबे/कृपा शंकर पांडेय के साथ भूपेंद्र व सुनील कुमार
– शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल, नये सत्र में बच्चों की संख्या हुयी कम
– बच्चों की कम संख्या को लेकर अध्यापक नहीं हैं गम्भीर
– सभी अध्यापकों का रटारटाया जबाब, बच्चे महुआ बीनने में हैं व्यस्त – अधिकारी हैं समस्या से बेखबर
– बेहिसाब बन रहे स्कूलों में मिड डे मील का खाना
– एक ही कक्षा में बैठाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा
– कक्षा 1 से 5 तक ब्लैक बोर्ड में मिलेंगे एक् ही सवाल
– सिर्फ कोरम पूरा करने में जुटे अध्यापक
जुगैल । सूबे में निजाम बदलने के बाद सरकार भले ही किये गए वादों को पूरा करने में पहले दिन से जुट गयी हो और हर दिन नयी-नयी योजना बनाने में जुटी है । नयी सरकार में शिक्षा मंत्री सहित मुख्यमंत्री स्वमं शिक्षा को लेकर कितना गम्भीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्कूलों में अध्यापकों को स्कूलों में जिंस और टीशर्ट पहनने पर रोक लगा दी है ।
मगर सोनभद्र में शिक्षा व्यवस्था अभी भी बेपटरी बनी हुई है । प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में सभी बच्चों के रिजल्ट वितरित करने के बाद नये सत्र की शुरुआत हो चुकी है । नए सत्र में जिस तरह से स्कूलों में उत्साह देखा जाना चाहिए था वह उत्साह फिलहाल सोनभद्र में दिखता नजर नहीं आ रहा है । जनपद न्यूज की टीम ने ऐसे ही कई विद्यालयों का दौरा कर जमीनी हकीकत को जानने की कोशिश की । जनपद न्यूज टीम ने चोपन ब्लाक के दुर्गम क्षेत्र कहे जाने वाले जुगैल में सबसे पहले दुबटिया विद्यालय का दौरा किया । जहां स्कूल में सभी कक्षा के बच्चे एक कमरे में बैठे नजर आए। अध्यापक कैमरा देखते ही हरकत में आ गये और अध्यापक बोर्ड पर डेट डालकर अपनी उपस्थिति दर्ज करने लगे । जब दुबटिया विद्यालय के प्रधानाध्यापक रेवतीरमण पाठक से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यूं तो स्कूल में बच्चों की संख्या ज्यादा है मगर आज मात्र 6 बच्चे ही स्कूल आए हैं । शेष बच्चों के बारे में उनका कहना है कि गांव में बच्चे महुआ बीनने में लगे हुए हैं । लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि 6 बच्चों के लिए 3 अध्यापक 2 दो रसोईया लगे थे । 
उसके बाद टीम ने दूसरे विद्यालय करवानिया का जायजा लिया जहां दो अध्यापक मौजूद थे और उस विद्यालय में 43 बच्चों मे महज 8 बच्चे ही स्कूल आए थे । इस विद्यालय की बात करें तो इस स्कूल में एक ही कमरे में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को बैठाया गया था और सभी के लिए एक ही सवाल ब्लैक बोर्ड पर लिखा हुआ था । 
स्कूल के अध्यापक आदेश कुमार सिंह का कहना था कि आज पहला दिन है इसलिए संख्या कम है । लेकिन जब उनसे पूछ गया कि एक ही कमरे में 1 से 5 तक के बच्चे बैठे हैं और ब्लैकबोर्ड पर सभी के लिए एक ही सवाल क्यों । इस पर उनका तर्क था कि पहला दिन होने के कारण उनके बौद्धिक क्षमता को परखा जा रहा है ।
यही स्थिति गौरघट्टी विद्यालय पर भी देखने को मिला । यहाँ भी 64 बच्चों में सिर्फ 5 बच्चे ही आये थे और कक्ष से अध्यापक नदारत थे और बच्चे अकेले ही बैठे टाइम पास कर रहे थे । जैसे ही अध्यापक की नजर कैमरे पर गयी वे आनन-फानन में बोर्ड पर डेट डालकर सवाल लिखने लगे । 
जब टीचर श्याम सुंदर कुशवाहा से बच्चों के कम आने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बच्चे गांव में महुआ बीनने व गेहूं की कटान में लगे है । लेकिन बाकी आये हुए बच्चों के पढाई को लेकर सवाल किया गया तो उनकी बोलती बंद हो गयी । उनका कहना है कि आज पहला दिन है इसलिए अध्यापक मीटिंग कर रहे थे ।
 इसके बाद टीम ने जुगैल उच्च प्राथमिक विद्यालय देखा गया तो वहाँ भी 144 बच्चों में महज 23 बच्चे ही उपस्थित मिले । यहाँ भी स्कूल के टीचर बलेन्द्र सिंह ने बताया कि वे जल्द ही संख्या को बढ़ा लेंगे और गांव – गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे । उनका भी तर्क था कि बच्चे स्कूल न आने के पीछे कारण गांव में महुआ बीनने में लगे हुए है । लेकिन यहाँ भी अध्यापक कैमरा देखने के बाद ही हरकत में आये और बोर्ड पर डेट डालकर खिसक लिए ।
भले ही सरकार शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास कर रही हो मगर जमीनी हकीकत इसी बात से लगाया जा सकता है कि बच्चो को सीएम व पीएम तक का नाम तक पता नहीं ।

कागजों और मिड डे मील के आंकड़ों पर टिकी सोनभद्र की शिक्षा व्यवस्था की पोल तो आख़िरकार खुल ही गयी है । अब देखने वाली बात यह है कि आखिर अधिकारियों को यह सब कब दिखता है ।

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